विधानसभा किसी के बाप की नहीं!" - भाई वीरेंद्र के विवादित बयान ने बिहार सदन में मचाया भूचाल

Published on: July 23, 2025

विधानसभा किसी के बाप की नहीं!" - भाई वीरेंद्र के विवादित बयान ने बिहार सदन में मचाया भूचाल

बिहार विधानसभा में आज RJD विधायक भाई वीरेंद्र के विवादास्पद बयान "विधानसभा किसी के बाप की नहीं है..." ने राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया। यह टिप्पणी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के बीच SIR मुद्दे पर चल रही गरमागरम बहस के दौरान सामने आई। विधानसभा अध्यक्ष नंद किशोर यादव ने तुरंत माफी मांगने का आदेश दिया, जबकि डिप्टी सीएम विजय सिन्हा ने राजद पर "लोकतंत्र की मर्यादा भंग करने" का आरोप लगाया। इस घटना के बाद सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।

SIR विवाद से शुरू हुआ तनाव, भाई वीरेंद्र के बयान ने बढ़ाई आग

विधानसभा सत्र की शुरुआत ही विपक्ष के हंगामे के साथ हुई। तेजस्वी यादव ने स्पेशल इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट (SIR) को वापस लेने की मांग करते हुए सरकार पर जमकर हमला बोला। जवाब में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 2005 से पहले के लालू-राबड़ी शासन को याद दिलाया और तेजस्वी को तीखा जवाब दिया: "तुम तब बच्चे थे, बिहार की हालत नहीं जानते।" यहीं से बहस गरमाने लगी।


"बाप" शब्द ने भड़काया विवाद, अध्यक्ष का कड़ा रुख

इसी बीच RJD विधायक भाई वीरेंद्र ने जो बयान दिया, उसने पूरे सदन को झकझोर दिया। उनके "विधानसभा किसी के बाप की नहीं" वाले वाक्य ने विधानसभा अध्यक्ष नंद किशोर यादव को आगबबूला कर दिया। अध्यक्ष ने तुरंत माफी मांगने का आदेश दिया: "सदन की गरिमा बनाए रखें। यह भाषा स्वीकार्य नहीं!" तेजस्वी ने हालांकि अपने साथी को बचाते हुए कहा, "गलती हो गई तो नाराज़ न हों," लेकिन सत्ता पक्ष के विधायकों ने इसे नहीं माना।

#MeToo की आवाज़ बनीं तनुश्री दत्ता का वीडियो वायरल, कहा - मुझे घर पर परेशान किया जा रहा है, कोई मेरी मदद करे'

डिप्टी सीएम सिन्हा का हस्तक्षेप और अध्यक्ष का गुस्सा

डिप्टी सीएम विजय सिन्हा ने भी इस मौके पर हस्तक्षेप किया और राजद पर अराजकता फैलाने का आरोप लगाया। लेकिन अध्यक्ष ने उन्हें भी खरी-खरी सुनाई: "सदन मैं चलाता हूँ, आप नहीं! आप बैठ जाइए।" इसके बाद अध्यक्ष ने कार्यवाही स्थगित कर दी, जिससे सदन में माहौल और तनावपूर्ण हो गया।

सत्र स्थगित होने के बाद डिप्टी सीएम विजय सिन्हा ने मीडिया से बात करते हुए भाई वीरेंद्र के बयान को "लोकतंत्र के मंदिर में गुंडागर्दी" बताया। उन्होंने कहा, "यह भाषा संसदीय मर्यादा के खिलाफ है। राजद लगातार सदन में अशांति फैलाने का काम कर रही है।"


निष्कर्ष: राजनीति या अराजकता?

यह घटना सिर्फ़ एक विवादित बयान तक सीमित नहीं है। यह बिहार की राजनीति में बढ़ते तनाव, सत्ता और विपक्ष के बीच गहरे मतभेदों और संवाद की घटती संस्कृति को दर्शाती है। जहाँ एक तरफ़ नीतीश कुमार अनुभव का रुख अपनाते हैं, वहीं तेजस्वी यादव युवा आक्रामकता दिखा रहे हैं। भाई वीरेंद्र का बयान इसी टकराव का नतीजा था, जिसने एक बार फिर साबित किया कि बिहार की राजनीति में भाषा और शालीनता का संकट गहराता जा रहा है। अब सवाल यह है कि क्या यह टकराव जनहित से ज़्यादा राजनीतिक रोटियाँ सेंकने का माध्यम बनकर रह गया है?

Related Articles

राजनीतिक गलियारों में एक बयान ने अचानक हलचल तेज कर दी है। आरोपों और सफाई के बीच जो टकराव सामने आया है, उसने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ पार्टी का सख्त फैसला, दूसरी तरफ उसी पार्टी के नेता का खुला जवाब—मामला अब सिर्फ बयानबाजी तक सीमित नहीं रह गया है। आखिर इस पू
अयोध्या की पावन धरती एक बार फिर ऐसे ऐतिहासिक क्षण की ओर बढ़ रही है, जिसकी चर्चा देशभर में हो रही है। राम मंदिर परिसर में इन दिनों विशेष धार्मिक गतिविधियां तेज हो गई हैं और दूर-दूर से संत-महात्मा तथा वैदिक विद्वान यहां पहुंच रहे है
देश की न्याय व्यवस्था में आए एक महत्वपूर्ण फैसले ने न केवल कानून और चिकित्सा नैतिकता की बहस को तेज किया है, बल्कि एक पुराने पौराणिक शब्द को भी अचानक चर्चा के केंद्र में ला दिया है। लंबे समय से अचेत अवस्था में जी रहे एक युवक के मामले ने अदालत को कठिन निर्णय लेने पर मजबूर किया। फैसला सामने आते ही स

About Author

नमस्ते! मैं एक उत्साही लेखक हूं जिसे खबरों और सामयिक विषयों में गहरी रुचि है। शेयर मार्केट और ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री पर मैं अपनी राय और विश्लेषण इस ब्लॉग के माध्यम से साझा करता हूं। मेरा लक्ष्य है कि आपको तथ्यपूर्ण जानकारी और विषयों की गहरी समझ प्रदान कर सकूं। इस मंच के जरिए, मैं समाज को जागरूक करने और विचारों के आदान-प्रदान को बढ़ावा देने का प्रयास करता हूं। आपकी प्रतिक्रियाएं मेरे लेखन को और बेहतर बनाने में सहायक होंगी। धन्यवाद!