अयोध्या में ऐतिहासिक पल की तैयारी: राम मंदिर के तीसरे तल पर ‘श्री राम यंत्र’ स्थापना का ऐतिहासिक अनुष्ठान

Published on: March 14, 2026

Ayodhya Ram Mandir third floor prepared for Shri Ram Yantra installation ceremony during grand Vedic rituals.
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अयोध्या की पावन धरती एक बार फिर ऐसे ऐतिहासिक क्षण की ओर बढ़ रही है, जिसकी चर्चा देशभर में हो रही है। राम मंदिर परिसर में इन दिनों विशेष धार्मिक गतिविधियां तेज हो गई हैं और दूर-दूर से संत-महात्मा तथा वैदिक विद्वान यहां पहुंच रहे हैं। नौ दिनों तक चलने वाले वैदिक अनुष्ठानों के बीच एक ऐसा आयोजन होने जा रहा है, जो मंदिर की आध्यात्मिक संरचना से जुड़ा हुआ माना जा रहा है। इस पूरे कार्यक्रम का केंद्र एक विशेष यंत्र की स्थापना है। आखिर यह ‘श्री राम यंत्र’ क्या है और इसकी स्थापना को इतना महत्वपूर्ण क्यों माना जा रहा है?

अयोध्या में शुरू हुई भव्य धार्मिक तैयारियां

अयोध्या | 2026: उत्तर प्रदेश की पावन नगरी अयोध्या में स्थित राम मंदिर अयोध्या एक बार फिर ऐतिहासिक धार्मिक आयोजन का साक्षी बनने जा रहा है। मंदिर के तीसरे तल पर ‘श्री राम यंत्र’ की स्थापना को लेकर नौ दिवसीय वैदिक अनुष्ठानों की शुरुआत हो चुकी है। मंदिर ट्रस्ट के अनुसार 19 मार्च को इस विशेष यंत्र को मंदिर के गर्भगृह में वैदिक विधियों के साथ स्थापित किया जाएगा। इस आयोजन को धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। देशभर से संत-महात्मा, वैदिक विद्वान और हजारों श्रद्धालु इस कार्यक्रम में भाग लेने के लिए अयोध्या पहुंच रहे हैं। मंदिर परिसर में यज्ञ, हवन और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूरे वातावरण को आध्यात्मिक स्वरूप दिया जा रहा है।


सरयू जल और कलश यात्रा से हुआ अनुष्ठानों का शुभारंभ

इस धार्मिक आयोजन की शुरुआत पवित्र सरयू नदी के जल से की गई। सहस्त्रधारा से लाए गए सरयू जल को विशेष पूजा-विधि के साथ मंदिर परिसर तक लाया गया। इसके बाद अयोध्या के प्रसिद्ध लक्ष्मण किला से भव्य कलश यात्रा निकाली गई। इस यात्रा में बड़ी संख्या में संत-महात्मा, श्रद्धालु और वैदिक विद्वान शामिल हुए। भक्ति और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच यह कलश यात्रा राम मंदिर परिसर तक पहुंची, जहां विधिवत कलश स्थापना की गई। राम मंदिर ट्रस्ट के सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा के अनुसार, कलश स्थापना से पहले प्रायश्चित पूजन कराया गया, जिसके बाद नौ दिनों तक चलने वाले वैदिक अनुष्ठानों की औपचारिक शुरुआत हुई। आने वाले दिनों में यज्ञशाला में विशेष हवन और धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाएंगे।

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तीसरे तल के गर्भगृह में होगी ‘श्री राम यंत्र’ की स्थापना

राम मंदिर ट्रस्ट के अनुसार इस आयोजन का सबसे महत्वपूर्ण क्षण वर्ष प्रतिपदा के दिन आएगा। इसी दिन राम मंदिर के तीसरे तल पर स्थित गर्भगृह में ‘श्री राम यंत्र’ की विधिवत स्थापना की जाएगी। यह यंत्र पिछले दो वर्षों से मंदिर परिसर में सुरक्षित रखा गया था और प्रतिदिन इसका नियमित पूजन किया जाता रहा है। अब इसे पूर्ण वैदिक विधि और मंत्रोच्चार के साथ स्थापित किया जाएगा। इस अनुष्ठान को संपन्न कराने के लिए देश के विभिन्न राज्यों से 51 वैदिक विद्वानों को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया है। इन विद्वानों की देखरेख में पूरे कार्यक्रम को परंपरागत वैदिक पद्धति के अनुसार संपन्न कराया जाएगा।


राम मंदिर निर्माण से जुड़े लोगों को मिलेगा सम्मान

इस ऐतिहासिक अवसर को विशेष बनाने के लिए राम मंदिर निर्माण में योगदान देने वाले लोगों को भी आमंत्रित किया गया है। मंदिर ट्रस्ट के अनुसार लगभग 300 निर्माण एजेंसियों और करीब 1800 श्रमिकों को इस कार्यक्रम में शामिल होने का निमंत्रण दिया गया है। मंदिर निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले मूर्तिकारों, पत्थर तराशने वाले कारीगरों, वास्तुकारों और इंजीनियरों को इस अवसर पर सम्मानित किया जाएगा। इसके अलावा निधि समर्पण अभियान में भाग लेने वाले उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के लगभग 3500 कार्यकर्ताओं को भी आमंत्रित किया गया है। इन सभी ने राम मंदिर निर्माण के जन अभियान में सक्रिय भूमिका निभाई थी, इसलिए यह कार्यक्रम उनके योगदान को सम्मान देने का भी अवसर बनेगा।


प्रशासनिक तैयारियां और देशभर में होगा सीधा प्रसारण

इस आयोजन की तैयारियों को लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी अयोध्या पहुंचकर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने मंदिर परिसर का निरीक्षण किया और प्रशासन तथा राम मंदिर ट्रस्ट के साथ बैठक कर कार्यक्रम की तैयारियों की समीक्षा की। अधिकारियों के साथ आगामी चैत्र रामनवमी के आयोजन को लेकर भी चर्चा की गई। मंदिर निर्माण में सहयोग देने वाली बड़ी संस्थाएं जैसे L&T और Tata Consulting भी इस आयोजन को सफल बनाने में सहयोग कर रही हैं। मंदिर ट्रस्ट के अनुसार 19 मार्च को होने वाले इस ऐतिहासिक कार्यक्रम का सीधा प्रसारण दूरदर्शन के माध्यम से किया जाएगा, ताकि देश-विदेश में रहने वाले करोड़ों श्रद्धालु भी इस विशेष धार्मिक क्षण के साक्षी बन सकें।

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