देश की न्याय व्यवस्था में आए एक महत्वपूर्ण फैसले ने न केवल कानून और चिकित्सा नैतिकता की बहस को तेज किया है, बल्कि एक पुराने पौराणिक शब्द को भी अचानक चर्चा के केंद्र में ला दिया है। लंबे समय से अचेत अवस्था में जी रहे एक युवक के मामले ने अदालत को कठिन निर्णय लेने पर मजबूर किया। फैसला सामने आते ही सामाजिक और राजनीतिक चर्चाओं में “कलनेमी” शब्द तेजी से गूंजने लगा। आखिर यह शब्द क्यों सामने आया, इसका रामायण से क्या संबंध है और इच्छामृत्यु पर चल रही बहस से इसका जुड़ाव कैसे बन गया—यही सवाल लोगों की जिज्ञासा बढ़ा रहे हैं।