सबरीमला सोना चोरी केस: कहां से शुरू हुआ विवाद, अब ईडी क्यों एक्टिव?

Published on: January 21, 2026

सबरीमला सोना चोरी केस: कहां से शुरू हुआ विवाद
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केरल का विश्व-प्रसिद्ध सबरीमला अयप्पा मंदिर एक बार फिर सुर्खियों में है, लेकिन इस बार आस्था नहीं बल्कि कथित “सोना चोरी विवाद” वजह बना है। मंदिर की द्वारपालक मूर्तियों और पवित्र संरचनाओं पर चढ़े सोने की परत से जुड़े इस मामले ने अब राजनीतिक, प्रशासनिक और जांच एजेंसियों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। वर्षों पुराने रिकॉर्ड, घटता वजन और रहस्यमय लेन-देन ने इस केस को गंभीर आपराधिक जांच की दिशा में मोड़ दिया है, जिसकी परतें अब प्रवर्तन निदेशालय तक पहुंच चुकी हैं।

विवाद की जड़: मरम्मत के नाम पर निकला सोना

इस पूरे विवाद की जड़ साल 2019 से जुड़ी मानी जाती है, जब मंदिर की द्वारपालक मूर्तियों और कुछ अन्य हिस्सों की मरम्मत व दोबारा गोल्ड प्लेटिंग के लिए सोने की परत हटाई गई थी। त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड के दस्तावेजों के अनुसार, उस समय लगभग 42.8 किलोग्राम सोना प्लेट्स के रूप में निकाला गया और चेन्नई की एक निजी एजेंसी को भेजा गया। जब यह सोना वापस लौटा, तो वजन घटकर करीब 38.2 किलोग्राम रह गया। शुरुआती स्तर पर इसे तकनीकी कारणों और घिसावट का नतीजा बताकर टाल दिया गया, लेकिन यही “वजन का अंतर” आगे चलकर पूरे मामले की सबसे बड़ी कड़ी बन गया।

समय के साथ जब मंदिर की पुरानी और नई तस्वीरों की तुलना की गई और रिकॉर्ड खंगाले गए, तो संदेह और गहराने लगा। आरोप है कि मरम्मत की प्रक्रिया के दौरान सोने की परत जानबूझकर कम की गई और कीमती धातु का दुरुपयोग हुआ। इसके बाद मामला केरल हाई कोर्ट तक पहुंचा, जहां अदालत ने इसे गंभीर मानते हुए विशेष जांच टीम (SIT) गठित करने का आदेश दिया।

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SIT की जांच और गिरफ्तारियां

हाई कोर्ट की निगरानी में शुरू हुई SIT जांच में मंदिर से जुड़े कई पुराने दस्तावेज, भुगतान विवरण और एजेंसियों से हुए करार खंगाले गए। जांच के दौरान यह सामने आया कि अलग-अलग चरणों में मंदिर की संरचनाओं से सोने की प्लेट्स हटाई गईं और नए प्लेट्स लगाए गए, लेकिन पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती गई। SIT की रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि कस्टडी में रखी गई पवित्र धातुओं की सुरक्षा में गंभीर लापरवाही हुई।

इसी जांच के तहत मंदिर के मुख्य पुजारी (तंत्री) कंदारारू राजीवारू की गिरफ्तारी हुई, जिसे इस केस की अब तक की सबसे अहम कार्रवाई माना गया। उनके साथ-साथ कई अन्य लोगों से भी पूछताछ की गई और यह दावा किया गया कि मामला सिर्फ लापरवाही का नहीं, बल्कि सुनियोजित गड़बड़ी का संकेत देता है।


ईडी की एंट्री, कई राज्यों में छापेमारी और चार चरणों की जांच

मुख्य पुजारी की गिरफ्तारी के बाद जांच को नया मोड़ तब मिला जब प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग के तहत केस दर्ज किया। ईडी की टीमें केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु में करीब 21 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी कर रही हैं। सूत्रों के मुताबिक, बेंगलुरु समेत कई शहरों में उन लोगों और संस्थाओं से जुड़े परिसरों की तलाशी ली जा रही है, जिनके नाम सोने के ट्रांजैक्शन से जुड़े हैं।
जांच को चार चरणों में विभाजित किया गया है—श्रीकोविल और सजावटी वस्तुओं पर सोने की परत, पुराने सोने के दरवाजों का बदलना, 2019 में द्वारपालक मूर्तियों की प्लेटों को हटाने की प्रक्रिया और 2025 में दोबारा गोल्ड प्लेटिंग से जुड़े सभी लेन-देन। एजेंसियों का मानना है कि इन सभी चरणों में एक ही पैटर्न दिखता है, जो बड़े आर्थिक अपराध की ओर इशारा करता है। अब पूरे देश की नजर इस बात पर टिकी है कि सबरीमाला सोना विवाद में अगला बड़ा खुलासा क्या होगा।

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