जानिए कौन है वो शख्स, जिसने 14 साल तक नंगे पांव रखकर PM मोदी के लिए निभाई प्रतिज्ञा

Published on: April 15, 2025

जानिए कौन है वो शख्स, जिसने 14 साल तक नंगे पांव रखकर PM मोदी के लिए निभाई प्रतिज्ञा

हरियाणा के एक समर्पित भक्त रामपाल कश्यप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए एक अद्भुत प्रतिज्ञा पूरी की। 2010 में उन्होंने संकल्प लिया कि जब तक मोदी देश के प्रधानमंत्री नहीं बन जाते, वे जूते नहीं पहनेंगे। 14 साल तक नंगे पांव रहने के बाद, 2024 में मोदी के तीसरी बार PM बनने पर उन्होंने अपनी प्रतिज्ञा पूरी की। उनकी इस अटूट भक्ति ने सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया और लोगों को हैरान कर दिया।


कठिनाइयों भरा सफर: 14 साल तक नंगे पांव

हरियाणा के सोनीपत जिले के रहने वाले रामपाल कश्यप एक साधारण किसान हैं, लेकिन उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति अगाध श्रद्धा ने उन्हें चर्चा का विषय बना दिया। 2010 में, जब नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे, रामपाल ने यह प्रण लिया कि "जब तक मोदी देश के प्रधानमंत्री नहीं बन जाते, वे जूते नहीं पहनेंगे।"

रामपाल ने अपने इस संकल्प को अडिग निष्ठा से निभाया। चाहे ठंड हो या गर्मी, बारिश हो या धूप—उन्होंने कभी भी जूते नहीं पहने। 2014 में मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद भी उन्होंने अपनी प्रतिज्ञा जारी रखी और कहा कि वे तब तक नंगे पांव रहेंगे, जब तक मोदी लगातार तीसरी बार PM नहीं बन जाते।

चिलचिलाती धूप हो या कड़ाके की सर्दी, बारिश की कीचड़ भरी सड़कें हों या फिर अपने ही बेटे के विवाह जैसा महत्वपूर्ण अवसर - रामपाल कश्यप ने हर परिस्थिति में अपने संकल्प को टस से मस नहीं होने दिया। वह ऐतिहासिक पल जब यमुनानगर में स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें अपने हाथों से जूते पहनाए, तब इस अद्भुत प्रण का समापन हुआ।

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वो भावुक पल: जब PM मोदी ने खुद पहनाए जूते

वह दृश्य आज भी रामपाल की आँखों में तैर आता है जब प्रधानमंत्री मोदी ने उनकी ओर बढ़कर स्नेहपूर्वक हाथ मिलाया। "आपने ऐसा क्यों किया?" मोदी के इस सवाल पर रामपाल ने अपने 14 साल के अथक संकल्प की कहानी सुनाई। प्रधानमंत्री का यह जवाब रामपाल के लिए जीवन का सबसे कीमती उपहार बन गया - "आज हम आपको जूते पहना रहे हैं। अब आगे ऐसा नहीं करना है। सेवा भाव से काम करना चाहिए, अपने आप को कष्ट नहीं देना चाहिए।"


वह पल जब बदल गई एक जिंदगी

धीरे-धीरे प्रधानमंत्री मोदी ने रामपाल के पैरों में जूते पहनाए, लेब बाँधे और पूछा - "ठीक से आ गया ना?" इस साधारण से प्रश्न में छिपी संवेदना ने रामपाल को अवाक् कर दिया। "मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि प्रधानमंत्री जी से मिल पाऊँगा," रामपाल की इस बात पर मोदी ने मुस्कुराते हुए कहा - "आपका संकल्प ही तो इतना पक्का था।" यह वह भावुक क्षण था जिसकी प्रतीक्षा में एक साधारण किसान ने 5100 से अधिक दिनों तक नंगे पांव जीवन जिया।

रामपाल की यह कहानी साबित करती है कि सच्ची भक्ति और दृढ़ संकल्प किस तरह साधारण व्यक्ति को असाधारण बना देते हैं। जब प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें जूते पहनाए, तो यह सिर्फ एक व्यक्ति की जीत नहीं, बल्कि पूरे भारतीय समाज के लिए संकल्प और साधना की जीत थी।

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