
लोकसभा में आज वक्फ संशोधन विधेयक पारित हो गया। 288 सांसदों ने इसके पक्ष में मतदान किया, जबकि 232 सांसदों ने इसका विरोध किया। इस बिल का उद्देश्य वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता लाना और अवैध कब्जों को रोकना है। सरकार का दावा है कि इससे वक्फ बोर्डों की कार्यप्रणाली में सुधार आएगा, लेकिन विपक्ष ने इसे अल्पसंख्यकों के अधिकारों के खिलाफ बताया। इस विधेयक के लोकसभा से पारित होने के बाद अब यह राज्यसभा में पेश किया जाएगा, जहाँ इसे लेकर कड़ा मुकाबला होने की संभावना है।
लोकसभा में वक्फ संशोधन बिल पारित
नई दिल्ली: संसद के निचले सदन लोकसभा में आज वक्फ संशोधन विधेयक को बहुमत से मंजूरी मिल गई। सरकार ने इस बिल को 288 सांसदों के समर्थन के साथ पास करा लिया, जबकि 232 सांसदों ने विरोध किया। इस विधेयक का उद्देश्य वक्फ संपत्तियों का डिजिटलीकरण, प्रबंधन में सुधार, और अवैध कब्जों को रोकने से संबंधित है। हालाँकि, विपक्ष ने इस विधेयक को अल्पसंख्यक समुदाय के अधिकारों के लिए खतरा बताया और इसे वापस लेने की मांग की।
बिल पास होने का गणित
लोकसभा में कुल 543 सीटें हैं, जिनमें से 516 सांसदों ने मतदान में भाग लिया। सरकार को बहुमत के लिए 272 वोटों की जरूरत थी, जिसे पार करते हुए 288 सांसदों के समर्थन से यह विधेयक पारित हो गया।
सरकार को इस बिल को पास कराने में एनडीए के सभी घटक दलों का समर्थन मिला, जबकि विपक्षी गठबंधन INDIA ने एकजुट होकर इसका विरोध किया। कुछ निर्दलीय सांसदों और छोटे दलों ने मतदान से दूरी बनाए रखी, जिससे सरकार को अपेक्षाकृत आसान जीत मिली।

वक्फ संशोधन बिल के मुख्य प्रावधान
- वक्फ संपत्तियों का डिजिटलीकरण – इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और अवैध कब्जों को रोकने में मदद मिलेगी।
- प्रबंधन समितियों में सुधार – वक्फ बोर्ड की संरचना को अधिक उत्तरदायी बनाया जाएगा।
- कानूनी प्रावधानों में बदलाव – वक्फ विवादों के त्वरित समाधान के लिए विशेष न्यायाधिकरण स्थापित किए जाएंगे।
- सख्त दंड प्रावधान – वक्फ संपत्तियों पर अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है।
विपक्ष का विरोध और आपत्तियाँ
कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और कई अन्य विपक्षी दलों ने इस विधेयक का जोरदार विरोध किया। विपक्ष की प्रमुख आपत्तियाँ इस प्रकार हैं:
- यह विधेयक वक्फ बोर्डों के अधिकारों को सीमित कर सकता है।
- अल्पसंख्यक समुदाय की संपत्तियों पर नियंत्रण बढ़ाने की साजिश हो सकती है।
- सरकार ने पर्याप्त चर्चा और सहमति के बिना इसे पारित किया है।
विपक्ष का कहना है कि यह विधेयक केवल वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में सुधार के नाम पर अल्पसंख्यक संस्थाओं को कमजोर करने का प्रयास है।
राज्यसभा में बिल पास होने की संभावना?
अब यह विधेयक राज्यसभा में पेश किया जाएगा, जहाँ कुल 238 सदस्य हैं। बहुमत के लिए 119 वोटों की आवश्यकता होगी।
- एनडीए के पास 121 सांसद हैं, जबकि कांग्रेस के पास 85 और अन्य दलों के पास 30 सांसद हैं।
- सरकार को विधेयक पारित करने के लिए 6 मनोनीत सदस्यों का समर्थन चाहिए होगा।
राज्यसभा में विपक्ष की स्थिति लोकसभा की तुलना में मजबूत है, इसलिए इस विधेयक को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कड़ा संघर्ष देखने को मिल सकता है।