
आज, 2 अप्रैल 2025 को, लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक 2024 पेश किया जाएगा, जिसका उद्देश्य वक्फ अधिनियम, 1995 में सुधार करना है। इस बिल को लेकर सत्तारूढ़ एनडीए और विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' के बीच तीखा टकराव देखने को मिल रहा है। एनडीए के पास लोकसभा में बहुमत (293 सांसद) होने के कारण बिल के पारित होने की संभावना अधिक है, लेकिन राज्यसभा में स्थिति नाजुक है, जहाँ बीजेडी और वाईएसआरसीपी जैसे दलों का रुख निर्णायक होगा। विपक्ष ने बिल को "असंवैधानिक" बताते हुए अदालत में चुनौती देने की धमकी दी है।
वक्फ संशोधन बिल 2024: क्यों है चर्चा में?
आज संसद के निचले सदन में पेश होने वाले इस विधेयक ने देशभर में तीखी बहस छेड़ दी है। केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय द्वारा तैयार इस प्रस्ताव में वक्फ संपत्तियों के प्रशासन को लेकर कई क्रांतिकारी बदलाव सुझाए गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह संशोधन देश के 8 लाख से अधिक वक्फ सम्पत्तियों (जिनका कुल मूल्य ₹1.5 लाख करोड़ से अधिक आंका गया है) के प्रबंधन में एक नए युग की शुरुआत कर सकता है।
बिल के प्रमुख प्रावधान: क्या कहता है नया ड्राफ्ट?
पात्रता में बदलाव: अब वक्फ दावेदार को कम से कम पांच साल से मुस्लिम धर्म का पालन करना होगा और संपत्ति पर कानूनी अधिकार रखना होगा।
महिला सशक्तिकरण: पारिवारिक वक्फ (वक्फ-अलल-औलाद) में महिलाओं को विरासत के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकेगा।
बोर्ड सुधार: प्रत्येक राज्य वक्फ बोर्ड में अब एक महिला सदस्य और एक गैर-मुस्लिम सदस्य की नियुक्ति अनिवार्य होगी।
सर्वेक्षण अधिकार: जिला प्रशासन को वक्फ सम्पत्तियों का डिजिटल सर्वेक्षण करने का अधिकार मिलेगा, जिससे अवैध कब्जों पर रोक लगाई जा सकेगी।
राजनीतिक रणनीति: किसका क्या है स्टैंड?
सत्ता पक्ष: केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने दावा किया है कि "यह बिल मुस्लिम महिलाओं को उनके संवैधानिक अधिकार दिलाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम है।"
विपक्ष: कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने ट्वीट कर इसे "संविधान के अनुच्छेद 26 पर हमला" बताया, जबकि एआईएमआईएम के असदुद्दीन ओवैसी ने संसद में "धर्मनिरपेक्षता को खतरे" की चेतावनी दी है।

कैसे पास हो सकता है बिल? संसदीय गणित और रणनीति का विश्लेषण
वक्फ संशोधन बिल को पास कराने के लिए सरकार को संसद के "नंबर गेम" को समझना होगा। लोकसभा में कुल 543 सीटों में से एनडीए के पास 294, जबकि INDIA गठबंधन के पास 234 और 14 अन्य सांसद हैं। हालाँकि, सरकार TDP और JDU के 28 सांसदों पर निर्भर है, जिससे पेरप्लेक्सिटी (उलझन) की स्थिति बन सकती है। बिल पास होने के लिए 272 वोटों की आवश्यकता है, और बशीरहाट सीट का रिक्त होना इस समीकरण को और जटिल बना सकता है।
राज्यसभा में भी स्थिति चुनौतीपूर्ण है—कुल 236 सदस्यों में से एनडीए के पास 121, कांग्रेस के पास 85, और 30 अन्य हैं। यहाँ सरकार 6 नॉमिनेटेड सदस्यों के समर्थन पर निर्भर करेगी। बर्स्टिनेस (अनिश्चितता) के कारण, सरकार को 119 वोट जुटाने के लिए रणनीतिक समर्थन की आवश्यकता होगी।
भविष्य की राह: क्या होगा आगे?
विधि विशेषज्ञ डॉ. फैजान अहमद के अनुसार, "यदि बिल पारित होता है तो इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर होना तय है।" उधर, अखिल भारतीय मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने एक बैठक बुलाकर इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया तय करने का फैसला किया है।