Published on: April 4, 2025

संसद के मानसून सत्र में गुरुवार देर रात वक्फ (संशोधन) बिल 2025 राज्यसभा से भी पारित हो गया। इस महत्वपूर्ण बिल पर लगभग 12 घंटे की लंबी चर्चा के बाद वोटिंग हुई, जिसमें 128 सांसदों ने समर्थन और 95 ने विरोध में मतदान किया। इससे पहले बुधवार को यह बिल लोकसभा में भी पारित हो चुका था। अब यह विधेयक राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा, जिसके बाद यह औपचारिक रूप से कानून का रूप ले लेगा।
प्रधानमंत्री मोदी ने बताया "ऐतिहासिक सुधार"
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वक्फ संशोधन विधेयक को ऐतिहासिक करार देते हुए इसे पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में एक बड़ा कदम बताया। शुक्रवार सुबह उन्होंने X (पूर्व ट्विटर) पर लिखा,
"वक्फ संपत्तियों में वर्षों से अनियमितता और भ्रष्टाचार का बोलबाला रहा है। इसका सबसे ज्यादा नुकसान गरीब, पसमांदा मुस्लिमों और महिलाओं को उठाना पड़ा। यह कानून इन सभी समस्याओं को दूर करने का माध्यम बनेगा।"
मोदी ने कहा कि यह नया प्रावधान वक्फ संपत्तियों के बेहतर प्रबंधन, रिकॉर्डिंग और डिजिटल ट्रैकिंग को सुनिश्चित करेगा, जिससे किसी भी प्रकार के दुरुपयोग पर लगाम लगेगी।

बिल पर राज्यसभा में गर्मागर्म बहस
राज्यसभा में बिल पर चर्चा के दौरान बीजू जनता दल (BJD) ने अपने सांसदों के लिए कोई व्हिप जारी नहीं किया। पार्टी ने अपने सदस्यों से कहा कि वे अपने अंतरात्मा की आवाज सुनकर मतदान करें। इस निर्णय को राजनीतिक हलकों में "नैतिक स्वतंत्रता" का प्रतीक माना गया।
इस दौरान भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने चर्चा में एक चौंकाने वाला किस्सा भी साझा किया। उन्होंने कहा,
"वक्फ बोर्ड ने एक बार ताजमहल पर भी अपना दावा ठोका था, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने सख्ती से खारिज कर दिया था। यह दर्शाता है कि वक्फ संपत्तियों को लेकर पारदर्शी ढांचा कितना जरूरी है।"
विपक्ष में असहमति, सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी
बिल के विरोध में कई विपक्षी दलों ने इसे अल्पसंख्यक समुदाय के अधिकारों में हस्तक्षेप करार दिया। कांग्रेस, DMK, तृणमूल कांग्रेस (TMC), और समाजवादी पार्टी (SP) जैसे दलों ने स्पष्ट रूप से विरोध जताया।
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन और कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने घोषणा की कि वे इस कानून को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे। जयराम रमेश ने X पर पोस्ट करते हुए लिखा:
"हम संविधान की रक्षा के लिए हर संभव मंच पर संघर्ष करेंगे। वक्फ संशोधन कानून अल्पसंख्यकों की स्वतंत्रता को प्रभावित करता है और हम इसे अदालत में चुनौती देंगे।"

जेडीयू के समर्थन से उपजा आंतरिक विवाद, 4 मुस्लिम नेताओं का इस्तीफा
जहां एक ओर जेडीयू ने इस विधेयक पर मोदी सरकार का समर्थन किया, वहीं दूसरी ओर पार्टी के अंदर से विरोध की आवाजें उठने लगीं। जेडीयू के समर्थन से नाराज होकर चार मुस्लिम नेताओं ने पार्टी छोड़ दी।
इस्तीफा देने वालों में शामिल हैं:
मोहम्मद शाहनवाज मलिक – अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के प्रदेश सचिव
मोहम्मद तबरेज सिद्दीकी अलीग – प्रदेश महासचिव
मोहम्मद दिलशान राईन – भोजपुर से पार्टी सदस्य
मोहम्मद कासिम अंसारी – ढाका विधानसभा सीट (मोतिहारी) से पूर्व प्रत्याशी
इन नेताओं ने कहा कि पार्टी का यह रुख अल्पसंख्यकों के हितों के विपरीत है और इससे उनका समुदाय खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है।
निष्कर्ष
वक्फ संशोधन बिल 2025 अब राजनीति के केंद्र में है। जहां एक तरफ सरकार इसे "विकास और पारदर्शिता" का प्रतीक मान रही है, वहीं विपक्ष इसे "धार्मिक अधिकारों में दखल" बता रहा है। राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद यह कानून पूरे देश में लागू होगा, लेकिन इसके इर्द-गिर्द उठे सवाल और विरोध की लहरें निकट भविष्य की राजनीति को निश्चित ही प्रभावित करेंगी।