नेपाल में हिंदू राष्ट्र की मांग तेज़, योगी आदित्यनाथ बने प्रेरणा, सड़कों पर उतरे लाखों हिंदू

Yogi in nepal

नेपाल, जो कभी दुनिया का एकमात्र हिन्दू राष्ट्र था, आज एक बार फिर हिन्दुत्व और राजशाही की बहस के केंद्र में है। हाल के दिनों में एक अद्वितीय राजनीतिक और सांस्कृतिक जागरूकता देखने को मिल रही है। नेपाल की सड़कों पर लाखों हिंदुओं का सैलाब उमड़ा, जिनकी एक ही मांग थी—राजशाही की पुनर्स्थापना और नेपाल को फिर से हिंदू राष्ट्र घोषित किया जाए। इस आंदोलन में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का नाम प्रमुखता से उभर रहा है, जिन्हें नेपाल में भी हिंदुत्व के नए चेहरे के रूप में देखा जा रहा है।


योगी आदित्यनाथ: नेपाल में बढ़ती लोकप्रियता

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ केवल भारत में ही नहीं, बल्कि नेपाल में भी एक प्रभावशाली हिंदू नेता के रूप में देखे जा रहे हैं। नेपाल में उनके विचारों और शासन शैली को सराहा जा रहा है, विशेष रूप से धार्मिक कट्टरता के खिलाफ उनके कड़े रुख को। कई हिंदू संगठनों ने योगी को नेपाल में हिंदू राष्ट्र आंदोलन का प्रतीक मानना शुरू कर दिया है। योगी ने हिन्दू धर्म के महत्व और संस्कृति की रक्षा पर जोर दिया, जिससे नेपाल के लोगों में एक नई ऊर्जा का संचार हुआ।


नेपाल में हिंदुत्व लहर: ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

नेपाल कभी दुनिया का एकमात्र हिंदू राष्ट्र हुआ करता था, लेकिन 2008 में राजशाही समाप्त कर इसे एक धर्मनिरपेक्ष गणराज्य घोषित कर दिया गया। इसके बाद से ही कई वर्गों में असंतोष बढ़ता गया। बीते कुछ वर्षों में नेपाल में हिंदू राष्ट्र की मांग तेज़ हुई है, और इस बार यह आंदोलन पहले से अधिक संगठित और उग्र रूप ले चुका है।

नेपाल की राजनीति में इन दिनों यह चर्चा जोरों पर है कि 77 वर्षीय ज्ञानेंद्र शाह की राजशाही में वापसी संभव हो सकती है। इस बीच रैली में शामिल लोगों ने "राजमहल खाली करो, राजा आओ, देश बचाओ" और "हिंदू राष्ट्र की पुनर्स्थापना" जैसे नारे लगाए। उल्लेखनीय है कि ज्ञानेंद्र शाह ने जनवरी में उत्तर प्रदेश की यात्रा की थी, जहां उनकी मुलाकात मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से हुई थी। महाकुंभ के बाद योगी आदित्यनाथ की लोकप्रियता में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है, और वे हिंदुत्व के सबसे प्रभावशाली चेहरे के रूप में पहले से ही स्थापित हैं।


 

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KP ओली का बयान: क्या संकेत दे रहे हैं?

नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने भी इस विषय पर अपनी राय दी है। ओली ने कहा कि नेपाल की सांस्कृतिक पहचान को बचाना आवश्यक है, और यह सिर्फ धर्म से नहीं, बल्कि नेपाल की परंपराओं और ऐतिहासिक मूल्यों से जुड़ा हुआ है। हालांकि, ओली ने सीधे तौर पर हिंदू राष्ट्र का समर्थन नहीं किया, लेकिन उनका बयान संकेत देता है कि वे नेपाल के धार्मिक मुद्दों को हल्के में नहीं ले रहे हैं।


लाखों हिंदू सड़कों पर: आंदोलन ने पकड़ी रफ्तार

नेपाल के काठमांडू, पोखरा, जनकपुर और विराटनगर जैसे प्रमुख शहरों में भारी प्रदर्शन हुए। लाखों हिंदू भगवा झंडे लहराते हुए नेपाल को हिंदू राष्ट्र घोषित करने की मांग कर रहे थे। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि धर्मनिरपेक्षता नेपाल के मूल स्वरूप के खिलाफ है और इसे तत्काल बदला जाना चाहिए।

नेपाल की वर्तमान सरकार ने इन प्रदर्शनों और मांगों को गंभीरता से लिया है। हालांकि, सरकार का कहना है कि देश की एकता और शांति को बनाए रखना सबसे महत्वपूर्ण है। विपक्षी दलों ने इन प्रदर्शनों को राजनीतिक रंग देने की कोशिश की है, लेकिन जनता का समर्थन हिन्दू राष्ट्र और राजशाही की मांग के पक्ष में है।


नेपाल में हिंदू राष्ट्र की मांग लगातार बढ़ रही है, और योगी आदित्यनाथ की लोकप्रियता भी इसमें अहम भूमिका निभा रही है। केपी ओली का बयान यह दर्शाता है कि नेपाल की राजनीति भी इस मुद्दे से अछूती नहीं रही। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या नेपाल की जनता अपनी मांग पूरी करवा पाती है या नहीं।

नेपाल की सड़कों पर उमड़ी भीड़ यह साफ़ दर्शाती है कि हिंदू राष्ट्र का मुद्दा अब सिर्फ एक विचारधारा नहीं, बल्कि एक जनांदोलन बन चुका है।

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