
रूस-यूक्रेन युद्ध को दो साल से ज्यादा हो चुके हैं, लेकिन अब तक इसका कोई समाधान नहीं निकला है। इस बीच, यूक्रेनी राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की के हालिया बयान ने वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है। जेलेंस्की ने दावा किया है कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन जल्द मर सकते हैं और इसके साथ ही युद्ध समाप्त हो जाएगा। उनके इस बयान के बाद यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या वाकई पुतिन किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं? क्या यह दावा किसी खुफिया रिपोर्ट पर आधारित है, या फिर यह एक राजनीतिक रणनीति मात्र है? आइए इस विषय को गहराई से समझते हैं, जिससे यह सवाल उठ रहा है—क्या पुतिन वास्तव में किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं?
क्या है जेलेंस्की का दावा?
जेलेंस्की ने एक इंटरव्यू में कहा कि उन्हें विश्वसनीय सूत्रों से जानकारी मिली है कि पुतिन की सेहत बहुत खराब है और वे किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित हो सकते हैं। उन्होंने यहां तक इशारा किया कि पुतिन की मृत्यु के बाद रूस में राजनीतिक उथल-पुथल होगी, जिससे युद्ध समाप्त हो सकता है। लेकिन क्या यह दावा सच्चाई पर आधारित है या फिर यूक्रेन की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है?
क्या पुतिन गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं?
पिछले कुछ वर्षों में व्लादिमीर पुतिन की सेहत को लेकर कई अटकलें लगाई जा रही हैं। कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि पुतिन कैंसर जैसी घातक बीमारी से ग्रसित हैं। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया कि उन्हें पार्किंसन जैसी न्यूरोलॉजिकल बीमारी हो सकती है। हालांकि, क्रेमलिन ने इन सभी दावों को खारिज किया है और पुतिन की सेहत को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
रूस की राजनीति में पारदर्शिता की कमी के कारण इन अटकलों को और बल मिलता है। कुछ खुफिया एजेंसियों और पश्चिमी मीडिया का मानना है कि पुतिन की बिगड़ती सेहत उनकी सत्ता को कमजोर कर सकती है। ऐसे में जेलेंस्की का बयान वैश्विक चर्चा का विषय बन गया है।
रूसी सरकार का रुख: क्रेमलिन ने जेलेंस्की के दावों को "निराधार" और "प्रोपेगैंडा" बताया है।
मीडिया रिपोर्ट्स की विश्वसनीयता: पश्चिमी मीडिया में कई बार पुतिन की बीमारी की खबरें आई हैं, लेकिन कोई ठोस सबूत नहीं मिला है।
यूक्रेन की मंशा: क्या जेलेंस्की का यह बयान रूसी मनोबल को तोड़ने की कोशिश है?
निष्कर्ष
जेलेंस्की के इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति को नई दिशा दी है। हालांकि, पुतिन की सेहत को लेकर कोई ठोस सबूत नहीं है, लेकिन अटकलें लगातार बढ़ रही हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले महीनों में इस मुद्दे पर क्या नई जानकारियां सामने आती हैं। क्या वाकई पुतिन किसी गंभीर बीमारी से ग्रसित हैं, या फिर यह केवल एक अफवाह है? इसका जवाब तो समय ही देगा, लेकिन इतना तय है कि रूस-यूक्रेन युद्ध का भविष्य पूरी दुनिया के लिए महत्वपूर्ण बना रहेगा।
क्या पुतिन की मौत युद्ध को रोक सकती है?
इस सवाल का जवाब पूरी तरह इस पर निर्भर करता है कि पुतिन के उत्तराधिकारी कौन होंगे और उनकी नीतियां क्या होंगी। यदि कोई ऐसा नेता सत्ता में आता है जो युद्धविरोधी है, तो यह संभव है कि रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के प्रयास किए जाएं। लेकिन अगर कोई कठोर राष्ट्रवादी नेता सत्ता में आता है, तो संघर्ष और भी तीव्र हो सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि रूस की सैन्य नीति केवल एक व्यक्ति पर निर्भर नहीं है। हालांकि, पुतिन की मृत्यु या उनके पद से हटने की स्थिति में युद्ध की दिशा बदल सकती है। इसलिए, यह कहना जल्दबाजी होगा कि पुतिन की मृत्यु से युद्ध समाप्त हो जाएगा।